“श्री बाबा हरिदास जी (साहित्य)”

बाबा हरिदास जी की शिक्षा
किसी भी देवी-देवता की पूजा-अर्चना का अनुकूल फल प्राप्त करने के लिए उसके आदर्शों तथा उसकी शिक्षा का पालन करना आवश्यक है। इसलिए बाबा हरिदास में आस्था रखने वाले भक्तगणों से भी विनम्र निवेदन है कि उचित फल प्राप्त करने के लिए बाबा हरिदास की शिक्षा तथा आदर्श का ध्यान रखें। बाबा हरिदास लोक सेवा मण्डल आपसे निवेदन करता है कि —
मांस, मदिरा, तम्बाकू, लहसुन व प्याज का सेवन न करें।
प्राणी मात्र की सेवा भावना को मन में रखें, बिना किसी जात-पात व भेदभाव के।
बाबा ने कभी शरीर कष्ट की पूजा की बात नहीं कही, इसलिए धाम पर पेट के बल या इस तरह का कोई शरीर को कष्ट देकर न आएँ। पेट पलनिया बाबा पूजा की प्रथा नहीं है।
तालाब (मल्लाह) पर स्नान के बाद अपना कोई कपड़ा गीला या सूखा छोड़कर मत जाएँ, 

हमारी सेवाएं

हम बाबा हरिदास जी की शिक्षाओं के अनुसार समाज में सेवा, स्वच्छता और अनुशासन को बढ़ावा देते हैं। हम सात्विक जीवनशैली, अंधविश्वास से दूरी, और सभी जीवों के प्रति समान भावना को प्रोत्साहित करते हैं। मंदिर में व्यवस्था, पूजा विधि और दान प्रणाली को सही रूप से संचालित करने में सहयोग करते हैं।

हमारे कार्य

हमारे कार्य बाबा हरिदास जी की शिक्षाओं पर आधारित हैं, जिनका उद्देश्य समाज में सेवा, स्वच्छता और सद्भाव को बढ़ावा देना है। हम जरूरतमंदों की सहायता, स्वच्छता अभियान, और आध्यात्मिक जागरूकता फैलाने जैसे कार्य करते हैं। साथ ही, हम लोगों को सात्विक जीवनशैली अपनाने और सभी के प्रति समान भावना रखने के लिए प्रेरित करते हैं।

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बाबा हरिदास जी की शिक्षा एवं नियम

बाबा हरिदास जी के उपदेशों का पालन करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। उनके द्वारा बताए गए नियम सरल और व्यवहारिक हैं, जिनका पालन हर व्यक्ति कर सकता है। बाबा जी ने सदैव सत्य, सेवा और सदाचार का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी है।

मुख्य नियम एवं अनुशासन इस प्रकार हैं:

  1. मांस, मदिरा, तम्बाकू आदि का सेवन न करें।
  2. लहसुन-प्याज का उपयोग न करें और सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  3. सभी जीवों के प्रति दया भाव रखें और किसी भी प्रकार का भेदभाव न करें।
  4. अंधविश्वास (पाखंड) से दूर रहें और सच्ची भक्ति अपनाएँ।
  5. स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
  6. स्नान करने के बाद ही पूजा-अर्चना करें।
  7. मंदिर में अनुशासन बनाए रखें और लाइन में ही दर्शन करें।
  8. प्रसाद को इधर-उधर न फेंकें और सम्मानपूर्वक ग्रहण करें।
  9. दान केवल निर्धारित दान-पात्र में ही करें या रसीद प्राप्त करें।
  10. मेले या उत्सव में अधिक मूल्य के आभूषण पहनकर न आएँ।

 

प्रश्न – उत्तर

प्रश्न: बाबा हरिदास जी के अनुसार सच्ची भक्ति क्या है?
उत्तर: बाबा हरिदास जी के अनुसार सच्ची भक्ति वह है, जिसमें व्यक्ति सच्चे मन से ईश्वर का स्मरण करे और उनके बताए मार्ग पर चले। केवल बाहरी आडंबर या दिखावे से भक्ति नहीं होती, बल्कि मन, वचन और कर्म से शुद्ध होकर ईश्वर की आराधना करना ही सच्ची भक्ति है।

प्रश्न: बाबा हरिदास जी अंधविश्वास के बारे में क्या कहते हैं?
उत्तर: बाबा हरिदास जी अंधविश्वास और पाखंड के विरोधी थे। उन्होंने हमेशा लोगों को सही ज्ञान और सच्चे मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। वे कहते थे कि बिना समझे किसी भी परंपरा या रिवाज को अपनाना उचित नहीं है।

प्रश्न: बाबा हरिदास जी सेवा भावना को क्यों महत्व देते थे?
उत्तर: बाबा हरिदास जी के अनुसार सभी जीवों में ईश्वर का वास है, इसलिए हर व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के दूसरों की सेवा करनी चाहिए। सेवा करना ही सच्ची पूजा के समान है।

प्रश्न: मंदिर में जाने के क्या नियम हैं?
उत्तर: मंदिर में जाते समय स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए, स्नान करके ही पूजा करनी चाहिए, लाइन में दर्शन करना चाहिए और अनुशासन बनाए रखना चाहिए।

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